Sunday, 18 March 2012

दस्तक

दिल पर चोट खाए इंसान के लिए कभी आसान नहीं होता की वो सबकुछ भूल कर जिंदगी की नयी शुरुआत करे | इसे में यदि दिल के दरवाजे पर दस्तक हो तो इंसान दरवाजा खोलने के पहले कई बार सोचता हैं | कभी-कभी तो दिल के दरवाजे खुल जातें हैं तो कई बार उस दिल के दरवाजे हर किसी के लिए बंद हो जातें हैं | ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ .............. पर दिल के दरवाजे नहीं खुले | आज भी बंद है मेरे दिल के दरवाजे किसी और दस्तक के इंतजार में |

मरे दिल के दरवाजे पे खड़ी हो तुम
दस्तक की तरह ।
पता है मुझे गुजर जाओगी तुम भी
वक्त की तरह ।।

किसके रोके रुका है ये, वक्त है जो
गुजर ही जायगा ।
चमन मे बहार कुछ पल को है, ये
उजड़ ही जायगा ।।

हर बात से वाकिफ हूँ मैं, किसी बात
से मुझे इंकार नहीं ।
हाँ, है इस दिल की मुहबत तुझसे, मगर
मुझे इकरार नहीं ।।

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