मुहब्बतों में हमने खुद को कभी
आजमाया नहीं है |
दिल चाहता बहुत है मगर हमने
किसीको बताया नहीं है ||
दिल है नाजुक बड़ा, बस एक ठोकर
से टूट जाएगा |
इसलिए छुपा के रखा है दिल अपना
किसीको दिखाया नहीं है ||
जिसे देखकर दिल धडके, जिसे
पाकर
मुझे सुकुन मिले |
कोई मंजर, कोई चेहरा ऐसा वक्त ने
अबतक दिखाया नहीं है ||
भटक रहा हुँ मैं, दर-दर की
ठोकरे
खा रहा हुँ |
खुदा ने अबतक मुझे, मेरे
महबुब से
मिलाया नहीं है ||
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